Monday, February 09, 2026

बंजर

देखते देखते गये दिन गुजर

सोचा न था ऐसाभी आयेगा मंजर

फुल तो खिले है मस्त

न जा ने हम ने क्यो सोचा 

जमीन अपनी है बंजर

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