Thursday, June 23, 2022

गर्व

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आम्ही मानव मारतो शिताफीने कित्येक किटाणू / जिवाणू 
गर्वाने फुगलाय आमच्यातला प्रत्येक अणूरेणू
आमच्यातल्यांना मारण्यास बनवलाय आम्ही बॉम्ब परमाणू
भारी पडलेच कसा छोटासा विषाणू ?
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#Covid-19

मैत्री

तंबाखूला नाही चव
मळण्याशिवाय घालून चुना
सोमरसाची नाही मजा
नसल्यास गप्पा मारण्यास मित्र जुना




Wednesday, February 02, 2022

जोडगळीची अडगळ

खुशाल ख्या माझी झडती 
लपवण्यास माझ्याकडे न काही 
माझ्या शब्दास नको दुसराची ग्वाही 
सप्तपदीनंतर सगळेच पोळलो, 
अजूनही होते लाही लाही 
वाचणाऱ्यास वाटे, लिहितो काहीबाही 
भोगण्याराला वाटे संपेल कधी साडेसाती

दु:खावलेला रोमियो

ऐ दुनिया मत कर एहसान
मै तो हूही एहसान फरामोश
हरकदम करता हू दिले ईश्क खामोश
वजूद तो अब खोहि दिया
बस मौत को कर दे ना आसान

Tuesday, July 27, 2021

सुटका

वाटते बसवले शांत, घटका दोन घटका
मारावा, बेमुराद झुरका
विसराव्यात कळत नकळत केलेल्या चुका
विचारांतूनच आता हवी आहे सुटका

Saturday, April 03, 2021

म

  1.  मी
  2. माझं 
  3. मला 
  4. मामा 
  5. मामी 
  6. मन 
  7. मण 
  8. मणी
  9. मान 
  10. मांस 
  11. मासे 
  12. मुका
  13. मुके 
  14. मुख 
  15. मूर्ख 
  16. मऊ 
  17. मेख 
  18. म्यान  
  19. मका 
  20. मत 
  21. मती 
  22. मात
  23. माता 
  24. माती
  25. मोती 
  26. माज  
  27. मांजा  
  28. मेज 
  29. मंच 
  30. माद
  31. मादी 
  32. मंद 
  33. मद्य
  34. मध्य 
  35. मधे  
  36. मंदी 
  37. मोड 
  38. मोची
  39. मोर
  40. मोरी 
  41. मोद 
  42. मोह  
  43. मळ   
  44. मळा   
  45. माळ 
  46. माळा 
  47. माळी
  48. मूळ
  49. मुळा
  50. मेळ 
  51. मेळा 
  52. माडी 
  53. मांडी
  54. मांडा
  55. मांडे   
  56. मंडी
  57. मिशी 
  58. माशी 
  59. मर 
  60. मार 
  61. मात्र 
  62. मात्रा 
  63. मंत्री 
  64. मावा
  65. मढं 
  66. मठ
  67. मूठ
  68. मठ्ठ 
  69. मठ्ठा 
  70. माठ 
  71. मीठ
  72. मिठी 
  73. मोठा
  74. मोट 
  75. मीट  (डोळे मीट )
  76. मोठ्ठा  
  77. माया 
  78. मौज 
  79. मोजे 
  80. मोज 
  81. मध 
  82. मित्र
  83. मेरू
  84. मेद 
  85. मेथी 
  86. मुली 
  87. मुले 
  88. मूत   
  89. म्हैस 
  90. म्हण 
  91. महान 
  92. मुलगा 
  93. मुलगी
  94. मळभ   
  95. मलूल 
  96. महाल 
  97. माहोल 
  98. मेकुड 
  99. मोहर 
  100. मोहळ
  101. मयुर 
  102. मयुरी 
  103. मोहरा 
  104. महती 
  105. माध्यम 
  106. मध्यम 
  107. मनन 
  108. मजल 
  109. मचाण 
  110. मशाल 
  111. मिष्कील 
  112. मुश्किल 
  113. मधील 
  114. माहीती 
  115. मिठास
  116. मिठाई 
  117. मोहित 
  118. मोहरी 
  119. मदत
  120. मुदत  
  121. मावशी   
  122. मंडई 
  123. मांडणी
  124. मादक
  125. मदारी 
  126. मंदार 
  127. मरतुकडी 
  128. मंडळ 
  129. मांडलिक
  130. मनोगत 
  131. मोदक 
  132. मोडीत 
  133. मंजिरी 
  134. मकरंद 
  135. मजबुत 
  136. मुरलेला 
  137. मुरंम्बा 
  138. मंजूळ 
  139. मुजरा 
  140. मुजोर 
  141. मातकट 
  142. मेतकुट 
  143. मेटाकुटीला 
  144. मर्कट 
  145. माकड 
  146. मूषक
  147. मांजर 
  148. मऊसुत 
  149. मनमित 
  150. मनस्वी 
  151. मानधन
  152. मंजूर 
  153. मजबूर 
  154. मिचकावणे (डोळे  मिचकावले )
  155. मिटले

Friday, April 02, 2021

फ

  1. फळ 
  2. फळा 
  3. फळी 
  4. फुल
  5. फांदी 
  6. फंदी 
  7. फुलणे 
  8. फितूर 
  9. फालतू 
  10. फिकीर 
  11. फेरी
  12. फिरणे
  13. फार 
  14. फेरा 
  15. फेरफार 
  16. फेरबदल 
  17.  फिसकटलं 
  18. फिसकरणे 
  19. फेटाळणी 
  20. फारकत 
  21. फरक 
  22. फरसाण 
  23. फावडं 
  24. फावणे  /फावलं 
  25. फणस 
  26. फाफडा 
  27. फेटा 
  28. फेटणे 
  29. फेक 
  30. फेकाफेक 

भ

  1. भांडी
  2. भाजी
  3. भजी
  4. भ्रांत 
  5. भारी
  6. भान
  7. भाऊ
  8. भीक
  9. भिती
  10. भात
  11. भाचा
  12. भाता
  13. भय
  14. भित्रा
  15. भूत
  16. भेट
  17. भोळा 
  18. भाळी 
  19. भोळी
  20. भोई  
  21. भीम
  22. भंगार
  23. भंगी
  24. भेंडी
  25. भांग
  26. भंग
  27. भोंदू
  28. भूक 
  29. भूल
  30. भलं 
  31. भाळ 
  32. भास
  33. भाप
  34. भार
  35. भट
  36. भाव
  37. भाल
  38. भाला
  39. भाषा 
  40. भेद 
  41. भुर्र 
  42. भूमि
  43. भूवी 
  44. भावी 
  45. भुप 
  46. भेळ 
  47. भांडण
  48. भोचक
  49. भिकार
  50. भाकरी
  51. भिकारी
  52. भाजणे
  53. भावुक
  54. भारत
  55. भन्नाट
  56. भोकाड
  57. भटजी 
  58. भाविक
  59. भाशिक
  60. भकास 
  61. भनक 
  62. भंकस 
  63. भाकड 
  64. भयंकर 
  65. भंपक
  66. भेदक 
  67. भंडार 
  68. भंडारी 
  69. भांडार 
  70. भांडवल 
  71. भागिदार 
  72. भरजरी 
  73. भरपूर 
  74. भरात  (वेड्याच्या भरात )
  75. भुरका 
  76. भुरकट 
  77. भूमिगत  
  78. भुवई 
  79. भुपाळी 
  80. भेसळ 
  81. भागवत 
  82. भगवा 
  83. भणंग 
  84. भयानक 
  85. भुताटकी
  86. भोवताल
  87. भरकटले
  88. भरमसाठ
  89. भेदभभाव
  90. भेदरलेला 
  91. भातुकली
  92. भंगलेला
  93. भारदस्त
  94. भारावलेला
  95. भगीरथ
  96. भागाकार
  97. भासमान
  98. भूईमूग 
  99. भटक 
  100. भटकंती 

प


  1. पण 
  2. पाणी
  3. पाकळी
  4. पंख
  5. पंखा
  6. पापणी
  7. पाप
  8. पाय
  9. पायरी
  10. पाच
  11. पेच
  12. पोच
  13. पेरू
  14. पंच
  15. पंचा
  16. पणती
  17. पणजी
  18. पकडापकडी
  19. पराक्रम
  20. पराजय
  21. पारीतोषिक
  22. परीतोष
  23. परी
  24. पिर
  25. पुरे
  26. परी
  27. पार
  28. पेढा
  29. पेठ
  30. पेठा
  31. पीठ
  32. पाळ
  33. पाळे 
  34. पाळी
  35. पळ
  36. पुळी
  37. पीळ 
  38. पाव 
  39. पर्वत
  40. पेव 
  41. पोंगा
  42. पेंगला
  43. पागल
  44. पेला
  45. पोल
  46. पाला 
  47. पाल 
  48. पाचोळा 
  49. पिंप 
  50. पेयं 
  51. पिवळा 
  52. पितळ 
  53. पाट 
  54. पातेले 
  55. पटेल 
  56. पेट 
  57. पेलवेल 
  58. पळवलं 
  59. पडवळ 
  60. पाढा 
  61. पाडाव 
  62. पडला 
  63. पाडला
  64. पाठवले 
  65. पद 
  66. पद्य 
  67. पद्म 
  68. पाद 
  69. पंकज 
  70. पाणावलेले 
  71. पेंड 
  72. पेटी 
  73. पती 
  74. पाटी 
  75. पोटी 
  76. पोती 
  77. पोकळी  
  78. पोकळ 
  79. पिकली
  80. पतंग
  81. पालखी
  82. पारंपारीक
  83. पाताळ
  84. पातळ
  85. पातळी
  86. पुंगी
  87. पांग
  88. पावती 
  89. पायघोळ
  90. पेज 
  91. पायजमा 
  92. पाज 
  93. पंगा 
  94. पांगापांग 
  95. पंगत 
  96. पारंगत 
  97. पराग 
  98. पाळीव 
  99. पाया 
  100. पत्ता 
  101. पट्टराणी 
  102. पट्टा  
  103. पुतळा 
  104. पुण्य 
  105. पुष्कळ 
  106. पुंगळी
  107. पुरचुंडी 
  108. प्रेमळ
  109. प्रेम 
  110. पराकाष्ठा   
  111. प्रकाश 
  112. प्रकर्षांने 
  113. प्रकाशने 
  114. प्रशिक्षण 
  115. प्राधिकरण 
  116. प्रवचन 
  117. परिवर्तन 
  118. पारितोषिक 
  119. प्रमाण 
  120. प्रमाणे 
  121. प्रयोग  
  122. प्रायोगिक 
  123. प्रदूषण 
  124. पारदर्शक 
  125. प्रदर्शन 
  126. प्रचार 
  127. प्रयत्न 
  128. प्रकांड 
  129. प्रश्न 
  130. प्राशन 
  131. पालक 
  132. पालुपद 
  133. पाळू 
  134. पळू 
  135. प्रपंच 

ब

  1. ब्र 
  2. बी 
  3. बिज 
  4. बाबा
  5. बाई
  6. बुवा 
  7. बरं
  8. बोंब
  9. बांबू 
  10. बोल
  11. बोली
  12. बोंड
  13. बेंड
  14. बंड
  15. बंब
  16. बंद
  17. बार
  18. बारा 
  19. बेंबी
  20. बेरी
  21. बोर
  22. बाद
  23. बाता  
  24. बाळ
  25. बेत
  26. बेट
  27. बटु 
  28. बुक्का 
  29. बुक्के 
  30. बळ 
  31. बळी 
  32. बाळ
  33. बाळी
  34. बापू  
  35. बूच 
  36. बोट
  37. बाऊ
  38. बाग 
  39. बोका
  40. बकरी
  41. बोकड
  42. बेडूक
  43. बदक
  44. बटाटा 
  45. बोंबिल
  46. बिचारा
  47. बारसं
  48. बादली 
  49. बाटली
  50. बिदागी 
  51. बेदम
  52. बासुंदी
  53. बक्कल
  54. बुरुज 
  55. बुरशी 
  56. बेचकी
  57. बाकडं
  58. बदाम
  59. बेकार
  60. ब्रह्मांड 
  61. ब्रम्हा 
  62. ब्राम्हण
  63. बेरकी 
  64. बारीक 
  65. बारकी 
  66. बेरीज
  67. बेनामी
  68. बागेश्री 
  69. बंदूक 
  70. बकलावा
  71. बालूशाही
  72. बाचाबाची 
  73. बागायती 
  74. बरबाद
  75. बेवारस
  76. बावळट
  77. ब्रीदवाक्य 
  78. ब्रह्मचर्य
  79. बोंबाबोंब
  80. बुजगावणी 
  81. बाकरवडी
  82. बेरकावे 
  83. बारकाईने 
  84. बळकावले
  85. बोचकारले
  86. बेरोजगार 

Sunday, November 15, 2020

घरकोंबडा

ना गाडी ना टांगा
घरीच बसा करून वर ढांगा
उगाच कशाला घ्या करोनाशी पंगा
लागल्याआहेत आधीच दवाखान्याच्या बाहेर रांगा

Tuesday, June 09, 2020

मोर्चा

परीस्थिती होऊ घातलीय गंभीर
चार मित्रांना गोळा करणेही झाले आहे मुश्किल
चहा पिता पिता, करणार तरी किती चर्चा
चर्चेची वेळ गेली केव्हाच, काढायलाच हवा मोर्चा
#BlackLivesMatter

रकून

हसतो मी दात विचकून
चालतो मी वाकून वाकून
सगळेच बोलतात मला टाकून
मी तर आहे निर्मळ रकून
https://www.youtube.com/watch?v=bF78WAdzRjQ

Bear

मला मध देते का कोणी मध?
अरे मध देत का कोणी मध?
करोनापाई, मधमाश्या पण नाही फिरकत
पोळं बांधून, त्यांच कामही नाही उरकत
मध देते का कोणी मध? मध ...
पत्ता शोधत आलोय, कारण दुकानही आहेत बंद
मलातरी तुम्हास त्रास द्यायचा नाही काही छंद
मध देते का कोणी मध? मध ...
आधीच ईतका उकाडा, त्यातून वाढलेत केस
तहानलेला जीव माझा, मधामुळे कासावीस
मध मागण्यास आलोय ओलांडून मी जंगलाची वेस
मध देते का कोणी मध? मध ...
https://youtu.be/sPfF1ZUIrvE #BearVisit

महत्व

झोपडी असू दे कि महाल
सगळ्यात महत्वाची असते चूल
घरात मंडळी असतिल कितीही
सगळ्यात महत्त्वाचे असते तान्हे मूल
झाडाला लाख असतिल पाने, फांद्या आणी मूळ
पण सगळ्यांना आवडते ते फूल
करा लाईक, अन् वेळेच्या अपव्ययाबद्दल चूकभूल

साकडं

जमत नाही रोज रोज धावणं
जमतही नाही नुसतं उभं राहणं बनून बुजगावणं
वाढलेलं हाडावरलं मांस आता मुश्किल झालंय कातडीत मावणं
देवा तुच कर थोडा आमच्यावतीने व्यायाम, एवढंच आहे तुझ्याकडे मागणं

दिवास्वप्न

गरम चहाबरोबर बिस्किट मारी
सकाळी सकाळी उरकली मस्त न्याहारी
टळटळत्या उन्हात दुपारी
दिसला मला एक हत्ती भारी
पाठीवर त्याच्या होती भली मोठ्ठी अंबारी
मोठ्या अंबारीत ठेवली होती फक्त छोटीशी सुपारी
सुपारी कापता कापता, लागली होती डुलकी
दिवास्वप्नातली मजाच न्यारी
गम्मत जम्मत म्हणून हि चारोळी हलकीफूलकी

साश्वत / advice from the peanut gallery

साश्वत असे काय आहे? <br /> नश्वर जीवन सारे <br /> कितीही तोडलेस अकलेचे तारे <br /> कालांतराने कोण कोणास विचारे? <br /> निवांत बसूनी खा रे दाणे खारे <br /> आजूबाजूची गंमत पहारे <br />

चोचले

उलटं लटकलेलच खाणार आम्ही वटवाघूळ
भलतच काहीतरी खुळ
अंगात आमच्या आहेचमुळी चुळ
करोना चारतोय अख्या मानवजातीला धूळ #Covid-19

हाताचे वाक्यप्रचार

मी: “आज रविवार, मोकळा दिवसं आहे”. असं जाहीर करताच मला लक्षात आलं - “हात दाखवून अवलक्षण म्हणजे नक्की काय”.
ती : “अरे वा, बराच पसारा झाला आहे, तु आवरून टाक, पण भांडी घासून झाल्यावर”. असं म्हणून ती हात धूऊन माझ्या मागेच लागली.
मी : “अगं, सकाळपासून माझी पाठ दुखते आहे. मी हातावर पोट भरणारा माणूस आहे. थोडा आराम करायला हवा आहे”. असं म्हणून मी हात वर केले.
ती : “असं का? माझा हातखंडा आहे पाठदुखी बरी करण्यात. थांब मी तुला लाटण्यानेच पाठ चोळून देते”.
हातघाईच्या या परिस्थितीत, माझा हात दगडाखाली आला होता. तिचे अवसान बघून माझ्या लगेच लक्षात आले कि तिच्या हातावर तुरी देऊन काम टाळणे आता शक्यच नाही, माझ्या आळसाने तिच्यासमोर हात टेकले, आणी मी हात धऊन भांडी घासू लागलो. काम करता करता, माझी पाठदुखी देखील हात चोळीत, फारसी तसदी न देताच निघून गेली.

Sunday, May 03, 2020

करोनाचे दुष्परिणाम

थांबलेली वैश्विक वणवण
संभाषणांत सतत तांत्रिक अडचण
कुलूपबंदीमुळे आर्थिक चणचण
अती-जवळीकेने होणीरी कौटुंबिक तणतण
शैथिल्यामुळे शारिरीक कणकण
या सगळ्यांचा विचार केल्याने डोक्यात भणभण
#covid19

सुरवंट

तुडवायचे असेल रखरखित वाळवंट
हाकावेच लागतिल मनातले आळशी उंट
हाकता हाकता वाढलेजरी दाढिचे खुंट
चित्त, वृत्ती ठेवा चंट
कारण, फुलपाखरांसही मुक्त उडण्याआधी
भोगावेच लागते बनूनी संकुचित सुरवंट

#covid19

छंद

गुलाब गोळा करण्याचा आहे मला छंद
त्यापरी बोचतात मला सतत काटे
होतात कधी कधी भयंकर तोटे
तळीराम होतो मात्र शांत, चाखताच मुरलेला गुलकंद

नोकरदाराचा शुक्रवार

वेतन तर नेहमीच राहिल क्षुल्लक
त्यात काय उरणार शिल्लक?
चला चालवूया उसनी अक्कल
शोधूया एखादी नविन शक्कल
होऊया निवृत्त, पडण्याआधी टक्कल

शेंबडं प्रेम

रुमाल देऊन म्हणालीस, आधी नाक पूस
बघतां बघतां,
ह्रदयालाच पळवलेस माझ्या लाऊन फूस
वाट बघून बघून,
निद्रानाशाने बदलतोय मी सारखी कूस
रिकाम्या बरगड्या फोडतात टाहो
त्यांची तरी कर कि प्रेमाने विचारपूस

Saturday, March 28, 2020

व्यसनी संगत

व्यसनी संगत
----------------------------------------
तंबाखूला नाही चव
मळण्याशिवाय घालून चुना
सोमरसाची खरी मजा
जमतो जेव्हा मित्रगट जुना






Sunday, March 22, 2020

corona विषाणू

चवीने खातो प्रत्येक जिवाणू
अस्वच्छतेपायी जीवेभावे पाळतो किटाणू
जरी बनवलाय आम्ही परमाणू
तरी भारी पडतोय सध्या छोटासा विषाणू

corona

घरी बसून बसून आला जरी कंटाळा
तरी घरी बसूनच, नको ते संपर्क टाळा
वाटलच तर घरालाच लावा टाळा
कसेही करून त्या coronaला पिटाळा


#Covid19

Sunday, March 15, 2020

fling

Once upon a time
I had a fling
Nothing mattered, Fun was Everything
I can't find it anymore
Even if I searched it with Bing

Saturday, March 14, 2020

पाणीपुरी आणि covid

बघताच पाणीपुरी, तोंडाला सुटले पाणी
आठवताच covid चा संसर्ग, पळाले तोंडच पाणी
परिस्थिती सध्या आहे फारच बिकट, सगळीकडेच आणीबाणी
निर्हेतुक सामाजिक हितगुजदेखील ठरूशकेल जीवघेणी
बसावे घरी शांत, टाळण्यास संसर्ग
उत्तम हाच एक मार्ग

सोमरस

स्काॅच आणी सोडा
जोडीला चकणा थोडा
आनंदी स्वारी, पोहचली उत्तुंग शिखरी
दौडवताच कल्पनेचा घोडा

निर्धार

शत्रुंना पिटाळले मारुनी सोटे
रोखणारे हितचिंतक ठरले खोटे
निर्धाराने सोडले घरटे
पसरताच पंख आकाशहि पडले थिटे

चाय पे चर्चा

काॅफीमध्ये जायफळ अन चहामध्ये आलं
न बोलताच, कसं काय करणार ऐकमेकांच्या मनातलं?
विचारवंताना पडतात असले फुटकळ प्रश्न
अन् प्रेमी युगलं असतात त्याच्यातच मग्न!

Thursday, March 12, 2020

ती पहाट

रात्रभर जागरण, होऊ घातली पहाट
आगळाच होता अमुचा त्यावेळी थाट
चटकदार चहात घालून दमदार आलं
अन चहाच्या कपात वादळ चहातंच शमलं

ती रात्र

काॅफीमध्ये टाकताच जायफळ
गप्पा सुरू झाल्या वायफळ
अचानकच, खुशीत येऊन म्हटली ती
घे की मला जवळ
अजून काढणारेस कितीवेळ कळ?

Tom and Jerry

शेपटीला देताच जोरात पीळ
उंदिर शोधू लागला बीळ
मांजराने विचाकारले दात, उंदराची बसली दातखीळ
तेवढ्यात दिग्दर्शकाच्या कॅमर्याचं संपल रीळ

Tuesday, February 04, 2020

गायत्री
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देवकृपेने जन्मलिस तू मुग्धापोटी
सगळ्यांनीच सांगितलं - आता खरी कसोटी
क्षणात विसरून बाहुली खोटी
ईराताईनेही स्वागतास तुझ्या, कसली कटी


तू बाळुंकी गुणी, झोपते पटकन लावताच वळकटी
तूझ्यासाठी हि चारोळी छोटी

Tuesday, December 31, 2019

आत्मविश्वास

आपलंच आपल्याभोवती असावं  असं वलय
जरी आजूबाजूला आला कितीही मोठ्ठा  प्रलय
वाटणार नाही कशाचंच भय
नेटाने चालत राहता यावं पुढे, पकडून आपली लय

सवयीचे जोडे

वाढत जातं जसं जसं वय
फाटक्या जोड्यांचीही जरा जास्तच होऊ लागते सवय
ते घालून चालवण्यात असते एक विशिष्ट लय
अन् अनुभवांमुळे वाटत नाही कशाचेच भय

विरंगुळा

प्रत्येकालाच हवा विरंगुळा
गुरफटतो मुखपुस्तकात दिवसातून दहा वेळा
चावलाच कधी पायास मुंगळा
रडण्याआधी टाकतो स्टेट्स - चावला मुंगळा, रडतोय कळावळा.

परीट

बघून कपड्यांचा पसारा
आला मला खुपच वीट
बोलावला मी एक परीट
परीट निघाला भलताच धीट
म्हणाला, ठेवत नाही तुम्ही कपडे नीट
आता मीच ठेवून घेतो सगळे कपडे
मलाच होतील मस्त फिट

दिलफेक आंशिक

वातावरण झालं होतं फारच गार
तुझ्या प्रेमाने केलं मला बेकरार
तेव्हाच केला मी माझ्याशीच करार
तुझ्यात नी माझ्यात
मी कधीच पडू देणार नाही दरार
मला माहिती आहे तुझी तक्रार
थंडीने या तूहि झाली आहेस खूपच बेजार
कवेत ये माझ्या कविते
मीच आहे तुझा गुलजार

कानमंत्र

घडवायचं असेल परीवर्तन
तर बदलावेच लागेल वर्तन
चालणार नाही करुन फक्त किर्तन

परिवर्तन

काना, मात्रा वेलांट्या
यांत अडकते ते शाब्दिक नर्तन

भावना पोहोचवते ते कीर्तन
आणी जे घडवते परिवर्तन
तेच खरे वर्तन

खंत

हेटाळणी फेटाळणी सतत
होउ लागलय सगळंच अळणी
जळी स्थळी पाषाणी
सतत सगळीकडे पाणचट पाणी

Wednesday, December 18, 2019

हाॅलिडे स्पेशल

कुणी खातो धक्के
कुणी मारतं बुक्के
काही असतात खरे
तर काही खोटे सिक्के

बायको

नियतीने मांडला पट
त्यात कधी होते पुढे वाटचाल पटापट
तर कधी पडते दान उलटे, उगाचच होते घट
दु:ख, संकट आले जरी चालून
रोखतेस त्यांना शिताफिने,
कधीच ओलांडू देत नाहिस तट
तुझ्यासमोर नियतीचीही चालत नाही वट

अनभिद्यन कि विरक्त?

निळ्या आकाशास काळ्या ढगांचे व्यंग
व्यंगातूनच झाले निर्माण ईंद्रधनुष्याचे रंग
उंच नभी उडतो विंहग
त्यास ना व्यंगाचे वावगे, ना रंगांचे कौतुक
तो मुक्त उडण्यात दंग

कल्पना विलास

सिंह झाला म्हातारा
दातांवर दात घासतो कराकरा
त्याच्या डरकाळीही उरला नाही दम
शेळीही मारते त्याला बेदम

प्रश्नांत मग्न

टपरीवर बसून प्यावा चहा
येतां जाता रस्त्यावरच्या गाई म्हशी पहा
असचं तर झालं आमचं काॅलेजचं शिक्षण
वडीलधार्यांना वाटलं, पोरांचं ठिक नाही लक्षण
शिस्त लागेल, लावून दिल्यावर लग्न
लग्नानंतरही पिता पिता चहा
सारखा पडतो एकच प्रश्न
नेहमी शेळीच का फोडते डरकाळी
अन् घाबरून का पळतो सिंह
देत देत किंकाळी?

पराक्रमी शेळी

एकदा सिंह उठला सकाळी
उठताच फोडली मोठ्याने डरकाळी
ऐकून डरकाळी वैतागली शेळी
एका फटक्यात सिंहाचाच घेतला बळी

हॅलोविन स्पेशल

रंगेबीरंगी मुखवटे
चित्रविचित्र पोशाख
चाॅकलेटची लयलूट
छोट्यांची सगळीकडे लुटपुट
धिप्पाड डायनोच्या आत व्यक्ती चिरकूट
अन् नाजूक बनी, जगदंबा 
बनून नाचते बेछूट
निरागस चिमुकली बनली रकून
म्हातारी चेटकीण चालत होती वाकून वाकून

श्वापदांचे मनोगत

गुराढोरांचा जीव सुखात
निवांत चरती गवत
हिंस्त्र श्वापद सदा दु:खात
अन्न त्याचे पळतं सतत

ताई

एक बाबा एक आई
सतत चाले त्यांची घाई घाई
लहान बाळ करते गाई गाई
शाळेत जाते मोठी ताई

चूकभूल

कधी प्यायला चहा
कधी प्यावी काॅफी
कधी खावे चाॅकलेट
कधी खावी टाॅफी
कधी झालीच चूक
तर मागावी लगेच माफी

ताकीद

एकदा बागेत चरत होता एक बकरा
ढेरपोट्या तिथेच बसून खात होता चहा नि खाकरा
खाता खाता दोघांनीही आजूबाजूस केला कचरा
तिकडून आला खाटीक, बकर्याची लावली व्यवस्था
ते बघताच, ढेरपोट्याची वाईट झाली अवस्था

Sunday, September 15, 2019

दिलफेक आशिक

कधी भरल्यापोटी खातो लोणी
कधी उपाशीपोटी पितो नुसतेच पाणी
कधी गोड गळ्याची ऐकतो गाणी
तर बसक्या घश्याने वाजवतो पिपाणी
तुझ्या बरोबर सगळ्यातच मजा
अन् तुझ्याविणा सगळ्याचीच सजा
म्हणून तर तूच माझी राणी

थांगपत्ता

देवा, तु मला एक गोष्ट सांग
लागू का देत नाहीस तुझा पत्ता थांग
कधी म्हणतोस आधी बाळासारखा रांग
तर कधी करतोस आद्या शोधण्यास तळ सागराचा अथांग

तंत्र

षडरीपुंनीच रचले हे षडयंत्र
नुसता गदारोळ सर्वत्र
समजो वा न व समजो तंत्र
चालवायचे सगळ्यांनाच हे शारिरीक यंत्र

Tuesday, August 13, 2019

नश्वर


आत्ता नको, नंतर कधीतरी
असे म्हणून सतत पुढे ढकलायचे
काहीतरी, कसतरी, करून काम अर्धवट संपवायचे
मुढापरी विश्वास ठेवून
मोजकेच असलेले हे श्वास अजून किती उधळायचे
हे नश्वरा, जगण्याचे गुपित तुला कधी कळायचे ?




Saturday, August 03, 2019

वहाणप्रेमी मैत्रीमैत्रिणींस समर्पित

व्यवहारसाठी ती(तो)फारच अजाण
क्षुल्लकशी घेण्यासाठी वहाण
तिने(त्याने) ह्रदयच ठेवले गहाण
त्यानंतर सगळीच झाली घाण

सुट्टीचा कार्यक्रम

कधी खेळू विट्टी दांडू
तर कधी बघू फळकूट चेंडू
कधी बागेत पेरू झेंडू 
तर कधी नुसतेच फिरू हिंडू

घरघुती बागकाम

प्रवेशदारी विखूरलेले होते बारीक दगडधोंडे
ईकडेतिकडे, सगळीकडे चिखलाचे शिंतोडे
बघून माखलेले इवले इवले जोडे
क्षणात सुटले मला पडलेले कोडे

स्मृतीं

आयुष्यभर बाळगली हक्काने स्वःताची झोळी
वजनही वाढवलं, खाऊन रोज गर्वाची गोळी
अचानक जमली अवतीभवती बघ्यांची टोळी
उंच, ढेंगणी, तर काही पांढरी, काळी
झटक्यात उघडली त्यांनी माझी झोळी,
येताच माझी पाळी
होती त्यात फक्त जुन्या अनुभवांची खिचडी शिळी

अनुभूती

समुद्र तोच, पण प्रत्येक लाट नविन
सुर्य तोच, पण प्रत्येक सकाळ नविन
चंद्र तोच, त्याचे भांडवल करणारा प्रत्येक रोमियो नविन
वेळही रोज तीच, पण क्षणोक्षणी काळ नविन
मेंदू तोच, पण विचार नविन
शरीरहि तेच, करामती नविन
चारोळ्यांचे विषयही तेच, उपरती नविन

भानामती

कुणास ठाऊक कुणी केली भानामती
भानहि नाही राहत, मंद होऊ लागली मती
अजून किती चुका करणार जमा अक्कलखाती
दिवसागणिक, अवघड होतंय ढकलणं रती

Saturday, July 20, 2019

move on.
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गाडीची हौस भागवली जर टांग्यावर
वाड्याचं तेल पडणारच वांग्यावर
वांग्याचं करा आता भरीत
बाकी सगळं घाला चुलीत

Thursday, July 18, 2019

प्रॉब्लेम सॉल्व्हर्स प्रॉब्लेम

घरात माझ्या सतत उत्पात
हृदयावर माझ्या अनेक आघात
नेटाने प्रश्नांवर करतो प्रघात
तरीही निरुपयायोगी मीच सगळ्यात 

Saturday, July 13, 2019

लबाड रोमियो

लबाड रोमियो
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जीभ अजूनही चावली का जाते इतक्या जोरात?
तू राहात नाहीस ग आता माझ्या हृदयात
घेतल्या होत्याखऱ्याच आणाभाका
लक्षात ठेवेन तुला, असेपर्यंत मी हयात
पण काय करू? विसरलो मी आता
कारण गोंडस बायको आहे घरात

अनुभवी चाळणी

त्याच त्याच जुन्या आठवणी
जुन्या सवयी पडल्या अंगवळणी
दोन्हीशिवाय जीवन अळणी
आणि वास्तविकतेशी सतत फाळणी

Saturday, July 06, 2019

The boiling frog

माझ्या टीकांचा मलाच बसतो चटका
चटका बसला तरी बसलोय टिकून
टिकून बसलो म्हणूनच नाही आता सुटका
सुटकेचा मार्गच नाही, कसे काय सटका?

माकडचाळे


माझ्या मनाचा मलाच लागतो चटका
द्या कुणी तरी मलाच माझ्यापासून सुटका
बसुद्या शांत,  दोन घटका
मनातल्या माकडांनो इकडून लगेच सटका

Wednesday, July 03, 2019

लुप्त

मी वेगळाच, ठोकून देते जनता बेलाशक
सगळेच सारखे, नाही काही यात शक
गंमत बघण्यास हजारो संख्येने हजर दर्शक
डोळ्यांदेखत अदृश्य, मुळातच मी पारदर्शक

Tuesday, July 02, 2019

बेजार गुलजार

मानवजातीस झालाय आजार
प्रत्येक गोष्टीचा भरवतो बाजार
हातावर टेकवताच रक्कम हजार 
विकण्यासहि तयार, नेसती विजार 


 

कोडे

मोठ्ठ्या कवटीत मेंदू लहान
डुंबत डुंबत करतो स्नान
ओळख पाहू मी कोण?

वय-उतारवय

दिवसामागून जातात दिवस, वाढत जातं वय
शाळेत वर्षाॅमागून जातात वर्ष, परीक्षांचं सतत भय
नोकरी-चाकरी, पगार हफ्ते, नको त्या गोष्टिंची सवय
लग्न होताच जीवनात येतो मोठ्ठा प्रलय
बायकोमुळे हेलपाट्यांनाही लागते मंजूळ लय

नवराबायकोंच्या या संसाराची तुटणार नाही लय
कितीही मोठा आला जरी प्रलय
सगळ्याचीच झालीय सवय
कशाचच नाही आता भय
पोरासोरांचही आता वाढू लागलंय वय

वाह्यात तरुणाई

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ब्रम्हचारी त्याला कोण विचारी
अविचारी सेवन, सवयीपाई लाचारी
भिकारी वर्तन, बघताच येते शिसारी
सुपारी पान सदा मुखी, तंबाखुची पिचकारी

Wednesday, June 12, 2019

दिलजले

जले तो हम भी
पर दे ना सके किसी को प्रकाश
पर जीगर जाबाज था तो
धूवा हि बन उडे, घूमने निकले आकाश 

Tuesday, June 11, 2019

मन की करो

जग धावतयं वेगाने, धाऊ देत
तुम्ही थांबा
जग खातयं चाॅकलेटस, खाऊ देत
तुम्ही खा आंबा
जग वाचतय फेसबुकातले अपडेट, वाचू देत
तुम्ही गोष्टी सांगा
जग चालवतय मोटारगाडी, चालवू देत
तुम्ही हाका हक्काचा टांगा
जग लावतय कशाकरताही रांगा, लावू देत
तुम्ही झोपा निवांत, करून वर ढांगा

मराठी बाणा

आमच्या महाराजांनी जिंकले गडावर गड
त्यांच गडावर रिकामटेकडे आम्ही, खातो कलिंगड
त्यांच्या भवानीचा गडगडाट अजूनही घुमतो संह्याद्रीच्या कड्याकपार्यात
त्याच लग्नाची तीच ती गोष्ट चालू असते सतत आमच्या घरच्या संह्याद्रि दूरदर्श्नात
त्यांच्या वाघनखांच्या लचक्यास अन् सय्यद बंडाच्या दाण पट्ट्यांस,
अजूनही थरकापतो थडग्यातला अफजल खान
आमच्या नाजूक पकडीतून पडतो सतत iPhone
अन् सुटलेल्या ढेरीमुळे चड्डीच्या पट्ट्याचं बक्कल लावता लावता लचकते आमचीच ताठ मान
महाराजांच्या नावावरुन अजून दहा शतकं तरी
करता येईल मस्त गर्व
त्यामुळे मराठी माणसां तू बैस निवांत, शतकानुशतकं
येतीलच महाराज कंटाळून पुन्हापरत
नव्याने साकारण्यास मराठी पर्व

Sunday, June 02, 2019

जुळवाजुळव


अक्षरांचं महत्व शब्दात बसल्यावर
शब्दांची गम्मत पक्तिंत बसल्यावर
पंक्तींमधली रचना विचारपूर्वक
जमलं का यमक संमर्पक 

प्रचिती

प्रचिती
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चार भिंतीत खुंटली मती
शाळेंत अजूनही बीजगणित अन भूमिती
जोडीला ई, भू  ना चा ससेमिरा,  पाळा तत्कालीन रूढी रीती
झपाट्याने बदलतोय काळ किती
कधी येईल प्रचिती, शिक्षणाची का हि संथ गती ?

Friday, May 17, 2019

उदर भरण

उदर भरण
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विचारपूर्वक करावी निवड
निवडीलादेखील नाही सवड
दमले खांदे, वाहून कावड
शांत बसून खावी का खिचडी आणि पापड

नवर्याबायकोची भांडणं

कधी लोणच्याची आंबट फोड
तर कधी शिरा फारच गोड
प्रत्येक नवर्याला असते भारीच खोड
सतत गडबड, त्याने बायकोचा होतो हिरमोड
मग होणारच आदळाआपट, तोडफोड
हात जोडून करावीच लागते मग तडजोड
ती लटक्या रागाने म्हणते, चल हात सोड
यापुढे घे काळजी, जणू तळहातावर फोड
नवर्याबायकोच्या भांडणांना नाही कशाचीच तोड

Monday, May 06, 2019

बायको

मी मोत्यामागून मोती गुंफला
ओवला तिच्यासाठी मोत्यांचा हार
तिने क्षणामागून क्षण गुंफला


उभारला प्रेमाने आमचा संसार

चाळा : Incomplete

एक म्हातारा तंबाकू चोळीत चोळीत
चाळता चाळता शिळे वर्तमान पत्र
चाळा म्हणून जमूवून जनता एकत्र
चाळीस वर्षाचा अनुभव त्याचा सांगतसे चाळीत

तंबाकू चोळीत कि चोळीत तंबाकू
तंबाकू चोळीत केला त्यासी कोणी प्रश्न

पुष्पक विमान

त्यांचा चाले सतत सरकारनामा
त्यातून मेंदू माझा रिकामा
कधी ओलांडली मी परिसीमा
कळलेच नाही रे तुकारामा
तुला बरे मिळाले पुष्पक विमाना
करता करता रामा नामा
आम्ही जातो आमुच्या गावा
देऊन हाती फक्त विमा

मन

खंत
=====================
हेटाळणी फेटाळणी सतत
होउ लागलय सगळंच अळणी
जळी स्थळी पाषाणी
सतत सगळीकडे पाणचट पाणी

विनंती
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कधीना कधी निपचित पडेलच देह
यात ना काही संदेह
त्याआधी तरी मनास मारू नकाहो
उद्वेगाने फोडतो हाच टाहो

रंगमंच

कधी खाल्ले लाडू
कधी खाल्ल्या वड्या
कधी खाल्ल्या खूप छड्या
काही ना काही सतत काड्या
लहानपणापासूनच आम्ही धडपड्या
सतत करतो काही ना काही काड्या
गरज पडल्यास पुरुषांनाही नेसवतो साड्या
पण मज्जा येते कि नाही गड्या 



Saturday, May 04, 2019

सूत्र

सूत्र
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वेचून घ्यावे क्षण अनुभवाचे
हेचि रहस्य क्षणभंगुर जीवनाचे
खळखळून हसणे, लक्षण परिपक्वतेचे
वायफळ वादविवाद, लक्षण मूर्खाचे

समय

समय
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ना पहिल्या वेळीची उत्कटता नको
ना शेवटच्या क्षांमधली ओढ नको
नकोच ते आठवणींचे शेवाळ
नकोच ते आठवणींचे शेवाळ
जगू जीवन एकदम मावळ
पुढे सरकत राहील आता फक्त काळ

पेय : जे आवडेल ते

चाकोरीच्या चौकटीत सगळेच होतात चारी हात चीत
उघड्या डोळ्याने जो तो बघतो गम्मत पडून निपचित
कानावर सतत निरर्थक बातचीत, समाजाची हिच रीत
कशाला जगायचं भीत भीत, मज्जा कर मस्त, पेय पीत पीत

उगाच

कधी केली अर्चना
कधी केली गर्जना
तर कधी नुसतीच शब्द रचना
अर्धवट विचारांना मुखपुस्तकात केले रवाना 

साचा

कधी चौकटीत बसण्याचा
कधी चौकटीत बसवायचा
चालू सतत खटाटाटोप
बसलं तर ठीक,
नाही तर दे मनसोक्त चोप
साचेबद्ध जीवन जगण्याचा
हाच खरा साचा 

Diverse Team -

विविध कलागुणसंपन्न आमचे पथक
नेटाने करीती परीश्रम अथक
घाळलेल्या घामाचे होतेच सार्थक
विचारपूर्वक कृती जात नाही निरर्थक

अंतरीक्ष

कसा तोडू मी हा पाश
होण्याआधी सत्यानाश
विचार करण्यासही न अवकाश
कुठे मांडू बस्तान, केवढे अमर्याद आकाश

घरदार

रात्रीच्या पहिल्या प्रहरी आळवत होती राग केदार

कुणी तरी अचानक ठोठावले दार

उघडले दार, हाती घेऊनी सुरी धारदार

बिलगली लगेच, बघून समोर प्रियकर दिलदार

Surprise | अनपेक्षित

घेतली हाती सुरी धार धार
सुरु झाले आडवे उभे, तिरपे तारपे सपासप वार
हळूहळू घावांचा आवेग उतरला
डोळे गच्च पाणावले
चिरलेला कांदा मिळाल्याने
मन तिचे सुखावले



शालेय घोकम पट्टी

पाठ होतय म्हणून पाठांतर
पाठांतर म्हणून विचारात नाही अंतर
पाठ (कणा) असुनही पोटाशिवाय नाही गत्यंतर
भूकपाठी पळतो निरंतर

Wednesday, April 03, 2019

भांडण भांडण भांडण

all work and no play makes jack a dull boy
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रिकामटेकडं मन, जणू बेवारशी पटांगण
मेंदूला नाही वंगण
अन विचारांना नाही कशाचंच कुंपण
पटांगणाचं मग होतं लगेच रणांगण
मग घर असो वा अंगण
माझं माझ्याशीच होता भांडण
अरे यापेक्षा तो तहानलेला कावळा बरा
पाण्याविना न करता टणटण
खडे टाकून टाकून भरतो रांजण