ए गालिब चाहे कर ले शेरो शायरी
चाहे तेरे दिल के टुकड़े हजार
या तेरा दिल जानम के लिये बेकरार
तेरी शेरो शायरी सब बेकार
भुखे दोस्तों ने की है दरकार
खत्म कर ये कंजूसी और मक्कारी
अब तो पार्टी की है जिम्मेदारी तुम्हारी
खुश हैं हम, चाहे खिलाओ सब्जी-तरकारी
या हो गरमा-गरम 'झुकणा और भाकरी'
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