Sunday, April 19, 2026

मसला ही है मसाला

मसला ये नही कि मोहल्ला जल गया,

मसला ये है कि जलने से हल्ला मच गया।
वैसे जले तो करोड़ों दिल हैं उनके लिये—
जिनके छाती पे तिल है।
मसला वो भी नहीं है...
मसला ये है कि तिल दिख कैसे गया?
मसला ये नही कि किस्सों ने बनाया तिल का ताड़,
या ताड़ को ही बना तिल का किस्सा।
ताड़ गया भाड़ में!
तू बस... तिल को ताड़।
क्या फर्क पड़ता है क्या मसला है?
या क्यों मसला है?
बस देखा-देखी...
यही तो है जीने का सही मसाला!

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